टीम अन्ना का दिमाग ठिकाने पर है?

पिछले कुछ दिनोंमे समूचे भारतमें टीम अन्ना नामक एक दुनिया की सबसे बड़ी नाटक कंपनी को लोगोंके सामने नचाया जा रहा है. पुरे देश को ईमानदारी का पाठ पढ़ानेवाले टीम अन्ना के सदस्य अपनी काली करतुतोंकी वजहसे नंगे होकर भी बेशर्मो की तरह लोकतंत्र के नाम पर धब्बा लगाने का काम कर रहे है. भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन के माध्यमसे इन टीम अन्ना के सदस्योने अपनी एन.जी.ओ. के माध्यमसे करोडो रुपये इस देश की भोलीभाली जनता से ऐंठे है. गौरतलब है की पारदर्शी प्रशासन की मांग करनेवाले टीम अन्ना सदस्य खुद तानाशाह की तरह पेश आ रहे है. मनुवादी भारतीय मिडियाने हर बार की तरह सच को अनदेखा कर पुरे देश को झूठे सपने दिखाकर अन्ना के आन्दोलन में नचाया. शुरू में १००-१५० लोगोंकी भीड़(?) से शुरू हुआ आन्दोलन टी.वी. पर बार बार दिखाकर हजारो लोगोंको रस्ते पर उतारा गया. उनके मुद्दोंसे अलग कोई बात कहनेवाले को सीधा भ्रष्टाचारी, कांग्रेस का चमचा बताया गया.

टीम अन्ना की इस बर्ताव की वजहसे कई सदस्य टीम अन्ना छोड़ने पर मजबूर हो गए. और छोड़नेवाले जबतक टीम में थे तबतक वे दुधसे धुले थे, टीम छोड़तेही उनपर भी भ्रष्टाचार का आरोप किया गया. टीम अन्ना की हिम्मत इतनी बढ़ गयी की वे लोकतंत्रकोही चेलेंज करने लगे. किसीभी बड़े-छोटे व्यक्तिने उनके मुद्दोसे असहमति दिखाई तो उसे अभ्यास करने का सुझाव दिया जाने लगा. मानो पूरी दुनिया के होनहार लोग टीम अन्ना में हो. हालही में भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम ने एक कार्यक्रम में “लोकपाल से केवल जेलें भरेगी” एसा वक्तव्य किया तो टीम अन्ना ने उनकोभी अभ्यास करने का सुझाव दिया. सब दुनिया जानती है की भ्रष्टाचार यह परिणाम है. इसका कारण यहाँ की भ्रष्ट व्यवस्था में है. कानून करनेसे कुछ नहीं होगा. इस व्यवस्था को ही बदलने की जरुरत है. भ्रष्टाचार की शुरुवात तो हम अपने घरसे करते है. छोटे बच्चोंपर संस्कार डालते है की भगवान को नारियल की रिश्वत दो तो वे परीक्षा में पास करते है, मन्नते पूरी करते है.

टीम अन्ना के लोकपाल के दायरे में एन.जी.ओ. ना होने की वजह अबतक सामने नहीं आई है. भारत सरकार के Ministry of Home Affairs के Foreigners Division की FCRA Wing के दस्तावेजों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2008-09 तक देश में कार्यरत ऐसे NGO’s की संख्या 20088 थी, जिन्हें विदेशी सहायता प्राप्त करने की अनुमति भारत सरकार द्वारा प्रदान की जा चुकी थी. इन्हीं दस्तावेजों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2006-07, 2007-08, 2008-09 के दौरान इन NGO’s को विदेशी सहायता के रुप में 31473.56 करोड़ रुपये प्राप्त हुये. इसके अतिरिक्त देश में लगभग 33 लाख NGO’s कार्यरत है. इनमें से अधिकांश NGO भ्रष्ट राजनेताओं, भ्रष्ट नौकरशाहों, भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों, भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों के परिजनों, परिचितों और उनके दलालों के है. केन्द्र सरकार के विभिन्न विभागों के अतिरिक्त देश के सभी राज्यों की सरकारों द्वारा जन कल्याण हेतु इन NGO’s को आर्थिक मदद दी जाती है. एक अनुमान के अनुसार इन NGO’s को प्रतिवर्ष न्यूनतम लगभग 50,000.00 करोड़ रुपये देशी विदेशी सहायता के रुप में प्राप्त होते हैं.

शायद इतने बड़े पैमाने पर आ रहा पैसा इसका एक कारण हो सकता है. मेरा तो एक अनुमान यह भी है की कांग्रेसने ही टीम अन्ना को भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन चलाने के लिए पैसा दिया हो. मराठा सेवा संघ, बामसेफ जैसे संगठन व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई लड़ रहे है. उनके जनजागरण की वजह से मराठा-बहुजनोंमे काफी जाग्रति निर्माण हुई है. और यहांकी ब्राम्हणी व्यवस्था के खिलाफ जनता में असंतोष निर्माण हुआ था. जिसको निकलने के लिए टीम अन्ना का प्रेशर रिलीजिंग वाल्व की तारा इस्तेमाल किया गया. कुछ भी हो लेकिन अब हमारी यह व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई जरी रहेगी. जबतक यह विषमतावादी व्यवस्था मिट नहीं जाती हम चैन की साँस नहीं लेंगे.